गुरुकुल—मंझावली, फरीदाबाद (हरियाणा)

२. श्रीमद् दयानन्द वेदार्ष महाविद्यालय गुरुकुल यमुनातट, मंझावली, जिला – फरीदाबाद, हरियाणा

यह संस्था श्रीमद् दयानन्द वेदार्ष महाविद्यालय न्यास ११९, गौतमनगर-४९ से सम्बन्धित द्वितीय शाखा आचार्य जय कुमार जी के आचार्यत्व में आर्ष शिक्षा के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रही है। यह शाखा यमुना के तट पर हरियाणा की पवित्र भूमि पर भव्य भवनों के साथ-साथ विशाल भूखण्ड के माघ्यम से विख्यात है। इस संस्था की स्थापना ४ जून, १९९४ को श्री देवमुनि वानप्रस्थ (स्वामी शान्तानन्द जी) द्वारा प्रदत्त भूमि में की गई है।

१७ वर्षों के समय में दानियों के सहयोग, विद्वानों के आशीर्वाद एवं परमात्मा की अनुकम्पा से उत्तरोत्तर प्रगति पथ पर है। इस समय संस्था के पास बारह एकड़ भूमि तथा दो नलकूपों एवं नैष्ठिक ब्रह्मचारियों तथा साधकों के लिए योगसाधना की अनेक कुटियाँ हैं, जो कि आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त है। इसके साथ-साथ भव्य गोशाला, छात्रावास एवं यज्ञशाला का मनोहर दृश्य भी आगन्तुकों के हृदय को आकर्षित करता है। इस संस्था के अधीत-स्नातक देश-विदेश में अनेक स्थानों पर जाकर भारतीय संस्कृति एवं वैदिक सभ्यता का प्रचार-प्रसार श्रद्धा एवं निष्ठा से कर रहे हैं। यहाँ के छात्रों ने अनेक प्रतियोगिताओं में भाग लेकर महाविद्यालय का नाम शिखर पर पहुँचाया है।

इस संस्था ने वर्ष २00६ में एक महान ऐतिहासिक कार्य किया है। इस संस्था ने एक अभूतपूर्व पंचमासिक-महायज्ञ का अयोजन किया, जो तपोनिष्ठ श्रद्धेय स्वामी चित्तेश्वरानन्द जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इस यज्ञ में प्रायः देश के सभी गणमान्य विद्वानों ने अपनी आहुति प्रदान की है। इसी ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व यज्ञ में गुरुकुलों के प्राण आर्ष पाठविधि के प्रबल समर्थक समादरणीय आचार्य प्रवर हरिदेव जी संन्यास ग्रहण कर स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती बने।

इस संस्था में एक आयुर्वेदिक फार्मेसी का निर्माण आर्ष न्यास द्वारा कराया गया है। इस औषधालय में अनेक रोगों की चिकित्सा के साथ अनेक बहुमूल्य औषधियों का निर्माण भी किया जाता है।